Wednesday, August 17, 2016

मधुमेह और सेक्स जीवन

मधुमेह और सेक्स जीवन
धुमेह (Blood Sugar) के रोगियों में सेक्स या जननेन्द्रिय सम्बन्धी समस्याओं की संभावना अधिक होती है। यह आश्चर्य का विषय है कि भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मधुमेह के रोगियों में सेक्स सम्बन्धी समस्याओं पर न तो मरीजों ने और न ही चिकित्सकों ने ही विशेष ध्यान देने की जरूरत महसूस की है। मधुमेह के रोगियों में पुरूषों की समस्याओं अलग होती है और महिलाओं की अलग।

  1. लिंग में पर्याप्त तनाव का आना (Erectile Dysfunction) सामान्य व्यक्तियों की तुलना में मधुमेह के रोगियों में यह समस्या से 15 साल पहले आने की संभावना होती है। सामान्य व्यक्तियों में यह समस्या 15 फीसदी की होती है, जबकि मधुमेह के रोगियों में यह समस्या 45 से 55 प्रतिशत होती है।
  2. लिंग में पर्याप्त तनाव न आने के मुख्यतः दो कारक होते हैं-एक स्नायु सम्बन्धी (Nerves Neuropathy), दूसरा रक्त नलिका सम्बन्धित।
  3. मधुमेह के रोगियों में आम व्यक्ति की तुलना में उच्च रक्तचाप की संभावना 30 फीसदी अधिक होती है। लिंग में पर्याप्त कड़ापन न आने की वजह उच्च रक्तचाप भी हो सकती है।
  4. कुछ दवाओं की वजह से भी लिंग में तनाव न आना (Erectile Dysfunction) हो सकती है।
  5. महिला मधुमेह रोगियों की योनि में सेक्स के दौरान चिकने पदार्थ का स्राव न होने के समस्या हो सकती है, जिससे सेक्स (Inter Course) के दौरान दर्द हो सकता है।

सेक्स सम्बन्धी सावधानियां:

  1. मधुमेह के रोगी अपने जननांगों की पर्याप्त सफाई रखें।
  2. शारीरिक संबंध बनाने से पहले खासकर महिलायें मूत्र त्याग जरूर कर लें।
  3. सेक्स के दौरान एक दूसरे का भरपूर सहयोग करें और प्रोत्साहन दें।
  4. ऐसी औषधियां न लें, जो इस पर प्रभाव डाल सकती हैं।
  5. रक्तचाप को नियंत्रण में रखें।
  6. शराब एवं तम्बाकू का सेवन न करें।
  7. अगर महिला मधुमेह रोगी को सेक्स के दौरान योनि में सूखापन की समस्या आ रही हो तो चिकित्सक से परामर्श कर विशेष क्रीम का प्रयोग कर सकती हैं।
  8. विशेष परिस्थितियों में लिंग का कलर डाप्लर अल्ट्रासाउण्ड करायें।

डा0 सुधीर कुमार
मधुमेह एवं हृदय रोग विशेषज्ञ

पेशाब अधिक मात्रा में होता है।

मधुमेह

अधिक मात्रा में पेशाब का होना मधुमेह का रोगी प्रतिदिन कई लीटर पेशाब बाहर निकालता है, जबकि सामान्य व्यक्ति में पेशाब की मात्रा प्रतिदिन लगभग डेढ़ लीटर होती है। मधुमेह से ग्रसित व्यक्ति के सूखे होंठ यह दरसाते हैं कि वह बहुत अधिक प्यासा है। कुछ लोगों में पेशाब की मात्रा सामान्य से अधिक होती हैं, लेकिन उनके अन्दर शुगर नहीं होती। इसका एक कारण गुरदा फेलेयर भी हो सकता है। इस स्थिति में रात के समय पेशाब अधिक मात्रा में होता है। इस पेशाब का कम मात्रा में होने वाले पेशाब से मिलान करना चाहिए। यदि दोनों में अन्तर दिखायी पड़े, तो इनका परीक्षण करने के बाद ही रिपोर्ट के अनुसार इलाज कराना चाहिए। मधुमेह का पूरी तरह से इलाज न कराने पर इससे पीड़ित रोगी बेहोश भी हो सकता है। इस दशा से बचने के लिए रोगी को अपना ब्लड-शुगर टेस्ट कराते रहना चाहिए, जिससे बेहोशी की नौबत न आये। डाक्टरों का मानना है कि मधुमेह से पीड़ित रोगी की आँखों की रोशनी भी जा सकती है। मधुमेह के अनियन्त्रित होने पर उसका दुष्प्रभाव आँखों के रेटिना पर भी पड़ता है। अतः मधुमेह के लक्षण दिखायी देने पर ब्लड-शुगर टेस्ट जरूर कराना चाहिए, ताकि मोतियाबिन्द से बचा जा सके।
हाथ-पैरों में दर्द होना। ऑखों और मूत्रतन्त्र में संक्रमण होना। जॉघों और पसलियों में दर्द होना। चेहरे पर फालिज का प्रकोप । भोजन करते समय चेहरे पर अधिक पसीना आन। रात में सोते समय अचानक सॉस फूलन। खून में कमी, शरीर में सूजन, कब्ज़ की शिकायत और मूत्र की मात्रा का सामान्य से कम अथव। अधिक होना । लीवर के आकार में वृद्धि, अधिक दिनों तक पीलिया बीमारी का बने रहना, जोड़ों में दर्द और मुँह में बदबू तथा पायरिया के लक्षण। मधुमेह के लगभग चालीस प्रतिशत रोगियों में गुरदा-रोग पाया जाता है। यह किन परिस्थितियों में होता है, इसके बारे में नीचे बताया जा रहा है— c» यदि रोगी मधुमेह से काफी समय से ग्रस्त हो। - L» यदि रोगी के परिवार के लोग भी मधुमेहजनित J. - गुरदा–रोग से पीड़ित रहे हों। o/--> c» यदि मधुमेह का रोगी उच्च-रक्तचाप से भी ग्रसित - हो, तो उसमें गुरदा-रोग होने की सम्भावना होती है। @os c० मधुमेह रो पीड़ित चालीस बर्ष से कम उम्र के रोगियों Ay - में गुरदा-रोग होने की सम्भावना बढ़ जाती है।